आयुर्वेद के अनुसार भूख रोकने के नुकसान | उपवास के नियम

bhook rokne ke nuksan

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Hi Friends ..

भूख लगना और खाना खाना एक सामान्य प्रकिया है।लेकिन भूख लगना भी एक वेग है।आयुर्वेद के अनुसार इसके भी कुछ नियम है क्योकि भूख को रोका तो तकलीफ आयेगी।

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भूख को रोकने के दुष्प्रभाव :

क्योकि भूख को रोका तो 103 प्रकार के रोग हो सकते है जिसमे पहले है एसिडिटी और लास्ट में जाकर वही आंतो का कैंसर हो जाता है।तो भूख को कभी भी ना रोकिये ।

सबाल ये आया की हम तो उपवास करते है।लेकिन उपवास का अर्थ है शरीर की शुद्धि की क्रिया जो सही है क्योंकि शरीर शुद्ध तो चित्त शुद्ध होता है।

उपवास तब आवश्यक है जब आपके शरीर में कुछ हो रहा हो लिमिट से ज्यादा खा लिया हो ।

  • कभी भी उपवास सप्ताह में करते है तो एक दिन का ही ठीक है।सप्ताह में 3 टाइम खाते है तो 1 दिन का उपवास उचित है।उपवास वाले दिन समय -2 पर पानी पीते रहना चाहिए क्योंकि बिना पानी के उपवास ठीक नही है।क्योकि आप जब उपवास करते है तो पेट में अम्ल की क्रिया सतत चलती रहती है।आपने खाना खाया नहीं फिर भी अम्ल शरीर में बनता रहता है।ये अम्ल भी बहुत खतरनाक है जो की हाइड्रोक्लोरिक एसिड बनता है जो बहुत खतरनाक है।
  • अतः इस अम्ल को कम करने के लिए बार बार पानी पीना चाहिए जो की एसिड पानी के साथ मिलकर पेशाब से बाहर निकल जाता है।नहीं तो आतो को जला देगा गंभीर बीमारियों के शिकार होंगे।अतः उपवास करना है तो सप्ताह में 1 दिन का बो भी बार बार पानी पीकर निर्जला नहीं।
  • मासाहारी को लंबे उपवास करने चाहिये शाकाहारी को लंबे उपवास नहीं करने चाहिए।प्रकृति में तरह तरह के जीव है जानवर है कुछ मासाहारी कुछ शाकाहारी ।
  • मासाहारी अजगर एक बड़े बकरे को भी निगल जाता है पर 15 दिन तक कुछ नहीं खाता16 वे दिन ही खायेगा क्योकि कारण यह है कि मासाहारी जब मॉस खाता है तो वह मॉस उसके पेट में जाकर उस मासाहारी की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल की ग्रंथि को मन्द करता है मॉस का जो पाचन है वह एसिड की क्रिया को मन्द करेगा तथा वह कम निकलेगा।अतः शाकाहारी मनुष्य को बीच बीच में पानी पीते रहने चाहिए
  • आयुर्वेद के अनुसार भी पानी में कुछ प्रकार है जैसे लौंग का पानी,मूग का पानी,पानी में घी डालकर पीना,वो भी गाय का घी भैस का नहीं ।पक्का पानी,यानि उबालकर चूना डालकरा आदि ऐसे 23 -24 सूत्र बताये है
  • उपवास करने का सही तरीका तो एक दिन खाना खाना एक दिन उपवास किया जाए सही है इससे थोड़े दिन तो दिक्कत होगी फिर उसी हिसाब से HCl यानि हाइड्रोक्लोरिक अम्ल निकलने लगता है ।खेत में काम करने बाले ,मजदूर, कृषक, को उपवाश नहीं करना चाहिए जो शारीरिक श्रम नहीं करते है उन्हें ही करना चाहिए।सुबह का समय खाना खाने का सबसे बढ़िया दोपहर का नास्ते के सामान खाना खाना चाहिए और रात का कम से कम करना चाहिए।

वैध देवेन्द्र पाल चौधरी

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Benefits of power nap | Napping Benefits

खाने के तुरंत बाद आयुर्वेद के अनुसार दोपहर खाने के तुरंत बाद विश्रान्ति(आराम) या झपकी जरूर ले काम कोई न करे लगभग 20 मिनट तक

आयुर्वेद के अनुसार यदि दोपहर का भोजन अगर सुबह किया जाए तो अच्छा है अगर नहीं तो खाने के तुरंत बाद विश्रान्ति(power nap) या झपकी जरूर ले काम कोई न करे कब तक लगभग 20 मिनट तक !

खाने के तुरंत बाद विश्राम अवश्य करें

20 मिनट तक आराम (power nap) करे वो भी बाए हाथ को नीचे और दाहिने हाथ को ऊपर करके(जैसे भगवान विष्णु सोते है शेषनाग पर इस प्रकार)क्योकि हमारे शरीर में 3 नाडिया है

1. सूर्य नाडी

2. चन्द्रनाड़ी

3. मध्य नाड़ी

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खाने के तुरंत बाद विश्राम अवश्य करें

सूर्य नाडी भोजन पचाती है। ये तब पचाती है जब चंद्र नाडी कम चल रही हो।

भोजन पचाते समय सूर्य नाड़ी तेज होनी चाहिए नहीं है तो लेफ्ट साइड में लेट जाओ सूर्य नाड़ी चल जायेगी बैसे स्वस्थ व्यक्ति की सूर्य नाड़ी भोजन करते समय  स्वतः ही चालू हो जाती है।

दोपहर के भोजन के बाद आराम (power nap) कर लेना चाहिए वो भी 20 मिनट का इसे लेने से अगले आधे दिन का काम बहुत एनर्जी से होता है आज ही करके देखिये।

हमारे शरीर में 14 वेग है उनमें से निद्रा भी एक वेग है। हम खाना खाते है तो जठाराग्नि प्रदीप्त होती है खाना पचता  है तो शरीर का सारा खून पेट में आ जाता है भोजन पचाने में सहायता करता है तो सारे शरीर को खून की कमी पड़ती है तो ब्रेन को प्रेशर आता है वो आराम लेना चाहता हैतो सुस्ती आती है ये ही झपकी का समय है। ये प्रकृति का नियम है। तो ले लो एक झपकी छोड़ते क्यों हो लोगो को तो नीद आती नहीं गोलिया लेनी पड़ती है।

वाग्भट्ट जी के इस सिद्धांत पर यूरोप अफ्रीका आदि देशों में कानून बना रहे है कि दोपहर के खाने के बाद विश्रांति ले सके और उन्होंने पाया कि जिन लोगो को आराम कराया उन्होने 3 गुना अधिक काम किया ।

ऐसे ही लोगो को दोपहर का खाना खाने के बाद कम से कम 20 मिनट और अधिक 40 मिनट आराम करना  चाहिए क्योंकि जैसे ही भूख लगती है खाना खाते है ब्लड प्रेशर बढ़ता है और ब्रेन को ज्यादा प्रेशर बर्दास्त नही होता है ।और झपकी आती है।ने के तुरंत बाद विश्राम अवश्य करें

लेकिन शाम को खाने के बाद विश्रांति नहीं लेनी  चाहिए अगर 6 बजे खाना खा लिया है तो 8 बजे ही सोने जाये।कभी भी खाना खाकर सोये नही क्योकि शाम को सूर्य का प्रकाश नहीं होता और भोजन पचाने में समय लगता है। शाम को खाना खाकर सोने से डायबिटीज हार्ट प्रॉब्लम आदि हो जाती है।

इसी लिए आचार्य पतंजलि(आचार्य पतंजलि आचार्य वाग्भट्ट के बाद के है) बीच का रास्ता निकाला खाने के बाद एक ही आसान है जो किया जा सकता है बज्र आसन ।

इस आसन को करने से शरीर बज्र के सामान कठोर हो जाता है। अतः भोजन के बाद विश्रान्ति ले।
वैध देवेन्द्र पाल चौधरी

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how to drink water | Rules to drink water

how to drink water

वैसे तो पानी पीना एक सामान्य प्रक्रिया है लेकिन आयुर्वेद के अनुसार कुछ नियम है (Rules to drink water, how to drink water)

Ayurveda

आयुर्वेद के अनुसार प्यास एक वेग है प्यास बहुत बड़ा वेग है यदि प्यास लग रही है तो पानी जरूर पीजिये लेकिन सिप सिप करके (घूट-घुट) पीजिये जल्दी जल्दी नहीं पीजिये जल्दी जल्दी पीने से दो तरह की बीमारी होती है।

  1. हार्निया (आयुर्वेद के अनुसार आंत का उतरना)
  2. Apendetiotic

इसी तरह उम्र बढ़ने पर भी पानी पीते रहे तो बुढ़ापे में हाइड्रोसिल नामक बीमारी और प्रोस्टेड की समस्या होती है तो सिप सिप पानी पीजिये और प्यास लगे तो जरूर पीजिये रोकिये मत।

  • आयुर्वेद में एक ही जगह बिना प्यास के पानी पीने को कहा है वो है ऊषाकाल यानि (व्रह्म महूर्त) जो की सूर्य निकलने से डेड घंटे पहले होता है जब बिना प्यास के पानी पीना चाहिए।
  • खाना खाने के तुरंत बाद पानी मत पीजिये अगर ना रुका जाये तो सुबह के खाने के बाद जूस दोपहर के खाने के बाद छाछ और रात को दूध पीना चाहिए।अगर भी पानी पीना है तो 1घंटे बाद पीजिये।
  • अगर प्यास का वेग रोका तो बागभट्ट जी ने 58 रोगों की सूची बनाई।एक बात और कहते है कि ऊषा पान के अलावा ज्यादा पानी नहीं पीना चाहिए हमेशा मध्यम मार्गी रहना चाहिए ।
  • जब भी पानी पियें बैठ कर पानी पीजिये खड़े होकर नहीं ।
  • पानी दो तरह से बैठ कर पिए एक तो उकडू मारकर और दूसरा आलती पालती मारकर कुर्सी पे भी बैठकर पानी पी सकते है ।

इस तरह दिए गए आयुर्वेद के कुछ नियमो को अपनाकर आप पानी पिने से होने बाली असाबधानियो और रोगों से बचा जा सकता है।

उपवैध देवेन्द्र पाल चौधरी how to drink water

Dev chaudhary

Benefits of mango | mango benefits (in Hindi)

Hi Friends …

हिन्दुस्तान के अलग-अलग प्रांतों में अलग-अलग प्रकार के आम पैदा होते है। बैसे तो गर्मी के मौसम में आम का खट्टा-मीठा स्वाद सभी को लुभाता है। हर प्रांत के विशेष आम का स्वाद अपने आप में अलग होता है। जहां एक तरफ कच्चे आम से अचार, मुरब्बे और अनेक स्वादिष्ट पेय पदार्थ बनाए जाते हैं, वहीं पके हुए आम भोजन के साथ बड़े मजे से चबाए जाते हैं। पके आम का रस भोजन के दौरान एक परंपरा के तौर पर भी परोसा जाता है। आम के फलों के अलावा इसके पूरे पौधे में अनेक औषधीय गुण होते हैं। आइये जानते है आम के कुछ आयुर्वेद औषधीय नुस्खों के बारे में –

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1.खांसी में -पके आम को आग में भुन ले और ठंडा होने पर धीरे धीरे चूसने से सुखी  खांसी मिट जाती है

2. हिचकी में – आम के सुखे पत्तो को चिलम में भरके पिये या कूटकर रस निकल ले २ से ३  ग्राम में थोडा शहद  मिला ले और सेवन करने से हिचकी तुरंत मिट जाती है

3.मकड़ी के विष में– आम कि गुठली को पीसकर लगाने से या अमचुर को पानी मे मिलाकर लगाने से मकड़ी के छाले मिट जाते है

4.भस्मक (अधिक खाना) रोग में – मीठे आम का रस २५० ग्राम ४० ग्राम घी में १०० ग्राम खांड में मिलाकर १५ दिन खाने से भस्मक रोग ख़त्म हो जाता है

5.पौरुष बर्धक – रोज सुबह आम चूसने के बाद ऊपर से सौंठ और छुहारा डालकर पकाए दूध को पिने से पौरुष बर्धक होता है

6. सुगर (मधुमेह) – आम के छाया में सुखाये पत्तो को आधा लीटर पानी में गर्म करे १/४ रहने पर सुबह शाम पिने से मधुमेह रोग ख़त्म हो जाता है

7.पैरो की विवाई में – आम  के गोंद  विवाई पर लगाने से लाभ होता है

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8 .योनी रोग में – आम के फूल छल और पत्ती पानी में पिसकर बत्ती बना ले और योनी में दर्द करने से गर्भाशय के दुर्घन्दित द्रव और योनी कि दुर्गन्ध में लाभ होता है

9. कर्मी रोग में – काछे आम कि गुठली २५० मिलिग्रम  से ५०० मिलीग्राम तक दही के साथ सुबह शाम सेवन से सूत जैसे कर्मी भी नाश हो जाते है

10.उपदंश में – आम के पेड़ कि ताज़ी छल का रस २५ से ३० ग्राम तक सुबह बकरी के दूध के साथ ७ दिन सेवन करने से लाभ मिलता है

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वैध देवेन्द्र पाल चौधरी

Thank you , these are some Benefits of mango and you can send your ideas and feeling in comments.

benefits of curd | curd benefits in Hindi

Hi friends

माना जाता है कि किसी भी शुभ काम की शुरुआत से पहले अगर दही खा लिया जाये तो वह काम सफल हो जाता है । साथ ही, दही को सेहत के लिए बहुत अच्छा माना जाता है। इसमें कुछ ऐसे रासायनिक पदार्थ होते हैं, जिनके कारण यह दूध की तुलना में जल्दी पच जाता है। जिन लोगों को पेट की परेशानियां, जैसे अपच, कब्ज, गैस बीमारियां घेरे रहती हैं, उनके लिए दही या उससे बनी लस्सी, छाछ का उपयोग करने से आंतों की गर्मी दूर हो जाती है। पाचन अच्छी तरह से होने लगता है और भूख ज्यादा लगती है। दूध से बनने वाले दही का उपयोग खाने में हजारों सालों से हो रहा है। इसमें प्रोटीन, कैल्शियम, राइबोफ्लेविन, विटामिन बी जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं। दांतों और हड्डियों को मजबूत बनाने वाले कैल्शियम की मात्रा दूध की अपेक्षा दही में 18 गुणा ज्यादा होती है।

benefits of curd | curd benefits in Hindi

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